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Sunday, July 20

हज़रत अली (अ.s) की शहादत पे अज़दारों ने दिया पुरसा | अज़ादारी की तसवीरें

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Saturday, July 19

हजरत अली के शहादत शोकाकुल मुसलमानों का जुलुस |


हजरत अली के शहादत पर अजमेरी में स्थित मस्जिद शाह अता हुसैन में अंजुमने जुल्फेकारिया के बैनर तले मजलिस का आयोजन हुआ जहां मजलिस से पहले नमाजे जोहरैन जमात से अदा की गयी। तत्पश्चात् मोहम्मद अब्बास काजमी ने सोजखानी किया जिसके बाद मौलाना सैयद सफदर हुसैन जैदी ने कहा कि हजरत अली का पूरा जीवन गरीबों, यतीमों, विधवाओं के प्रति समर्पित था। हजरत अली ने इस्लाम की रक्षा हेतु अपना सर्वत्र न्यौछावर कर दिया। इसके बाद जुलूसे अलम व ताजिया निकाला गया जो नवाब युसूफ पर पहुंचा तो वहां तकरीर हुई जहां से जुलूस अंजुमन कौसरिया रिजवी खां के हमराह आगे बढ़े। कोतवाली चैराहे से अंजुमन जाफरी ने मातम करना शुरू किया जिसके बाद दूसरी तकरीर चहारसू पर हुई जहां से बलुआघाट के इमामबाड़ा मद्दू से अंजुमन हुसैनिया के हमराह जुलूस निकाले जो किले के पास पहुंचकर समाप्त हो गया। इसके पहले चहारसू चैराहे पर सैयद मोहम्मद हसन प्रधानाचार्य शिया इण्टर कालेज एवं अध्यक्ष अजादारी कौंसिल ने तकरीर करते हुये कहा कि हजरत अली ने ऐसी न्याय व्यवस्था अपने शासनकाल में बनायी जो आज भी मिसाल के तौर पर प्रस्तुत की जाती है।
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मौला अली (अ.स) की वसीयत -मौलाना स्य्यद सफ़दर हुसैन जैदी जौनपुर

मौला अली (अ.स) को १९ रमज़ान नमाज़ ऐ सुबह में इबने मुलजिम ने ज़रबत लगायी जिससे मौला अली (अ.स) की २१ रमज़ान को शहादत हो गयी |

मौला अली (अ.स) को ज़रबत लगने के बाद उन्हें यकीन हो गया था की वो अब नहीं बचेंगे उस वक़्त उन्होंने वसीयत की जिसे ध्यान से पढना चाहिए |

१) मैं तुम दोनों (दोनों बेटे हसन और हुसैन )को ,अपने तमाम अहल ओ अयाल को और जहाँ तक भी मेरा पैग़ाम पहुँचता है उस सभी को वसीयत करता हूँ तक्वा ऐ इलाही अख्तियार करें | अपने कामो को मुनज्ज़म (set) रखो ,आपस में ताल्लुकात को हमेशा सुधारे रहना क्यूँ की मैंने तुम्हारे नाना हज़रत मुहम्मद (स.अ.व) से सुना है की आपस के तालुकात सुधारे रखना आम नमाज़ और रोज़े से बेहतर है |

२) यतीमो के बारे में अल्लाह से डरते रहना उनको कभी भूखे रहने की नौबत ना आये और वो तुमारी निगाह के सामने बर्बाद ना हो जायें |

३) पड़ोसियों के बारे में अल्लाह से डरते रहना उनके बारे में पैगम्बर की वसीयत है और आप बराबर उनके हुकूक के बारे में नसीहत करते रहते थे की मुझे ऐसा लगता था कि आप उनको अपनी विरासत में भी शामिल कर सकते हैं |

४) कुरान पे अमल करना कहीं ऐसा ना हो की दुसरे लोग कुरान पे अमल के मामले में तुमसे आगे निकल जायें |

५) नमाज़ के बारे में अल्लाह से दरो क्यूँ की नमाज़ दीं का सुतून है |

६) अल्लाह के घर (मस्जिद) के बारे में अल्लाह से डरो और जब तक जिंदा रहना उसे खाली ना होने देना |

७) अपने जान माल और ज़बान से जिहाद करने के बारे में अल्लाह से दरो |

८) आपस में एक दुसरे से अच्छे ताल्लुकात रखना ,एक दुसरे की मदद करते रहना ,और खबरदार एक दुसरे से मुह ना फिराना |

९) रिश्तेदारों से ताल्लुकात न तोडना | नेकी की हिदायत और बुराई से रोकना तर्क ना करना और अगर तर्क करोगे तो तुम पे फसाद फैलाने वालों की हुकूमत हो जाएगी और तुम फरयाद करते रहोगे कोई सुनने वाला ना होगा |

१०) ऐ अब्दुल मुत्तलिब के बेटों अमीरुल मोमिनीन क़त्ल हो गए के नारे पे तुम मुसलमानों का खून ना बहाना और खबरदार मेरे क़त्ल के बाद मेरे कातिल के अलावा किसी को क़त्ल नहीं किया जा सकता | देखो अगर मैं इस ज़रबत से दुनिया से चला गया तो एक ज़रबत का जवाब सिर्फ एक ज़रबत ही है |

११) देखो मेरे कातिल के जिस्म के टुकड़े टुकड़े ना करना इसलिए की मैंने हज़रात मुहम्मद (स अव ) से सुना है की काटने वाले कुत्ते के भी हाथ पैर ना काटो |

तर्जुमा मौलाना स्य्यद सफ़दर हुसैन जैदी जौनपुर




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Thursday, July 17

जामिया इमाम जाफर सादिक में भव्य रोजा इफ्तार|


जौनपुर । जहा एक तरफ दुनिया में अतंकवादियो द्वारा बेगुनाहों के खून बहाए जा रहे है वा समाज को बाटने का काम किया जा रहा है । वही विश्व पटल पर आदि काल से ही शांति के दूत के रूप में अपनी पहचान बना कर दुनिया में अमन और शांति का सन्देश अपनी गंगा जमुनी तहजीब से देने वाले जनपद के अमन का पैगाम देने का सिलसिला आज भी जरी है ।

 बुधवार को जामिया इमाम जाफर सादिक में ऐसी ही एक भव्य रोजा इफ्तार पार्टी का आयोजन हुआ । जिसमे शिया- सुन्नी तो एक मंच पर दिखे ही तो वही हिन्दू मुस्लिम एकता की मिसाल भी देखने को मिली । एक ही दस्तरखान पर सभी लोगो ने बिना किसी भेद भाव के इफ्तार कर अपनी गंगा जमुनी तहजीब और एकता का सन्देश दिया । इस मौके पर शिया धर्मगुरु मौलाना सफदर हसन जैदी ने कहा की अल्लाह ने कुरआन में इंसानियत और आपसी भाईचारगी का सन्देश दिया है । जाती और धर्म के आधार पर भेदभाव करने को सख्ती से रोका गया है । हमें चाहिए की समाज को तोड़ने के बजाय एक साथ खड़ा करने का काम करे । और दुनिया को सन्देश दे की हम मानवता और इंसानियत के रक्षक है । उन्होंने कहा की जनपद हमेशा से ही इस बात कि मिसाल पेश करता रहा है की यहाँ के हिन्दू और मुस्लिम एक दुसरे के कंधे से कन्धा मिलाकर सुख दुःख बाटने का काम करते रहे है । रमजान की खुसूसियत बयान करते हुए उन्होंने कहा की आज विज्ञानं भी इसकी जरूरत महसूस करने लगा है । उन्होंने कहा की रोजे का सबसे बड़ा मकसद इंसान का अपने नफस पर काबू पाना है । क्योकि इंसान नफस अर्थात इक्षाओ के वश में होने की वजह से रास्ता भटकता है । जब इक्षाए इंसान के बस में हो जाती है तो मंजिल उसके कदम चूमने लगती है । मौलाना ने कहा की रमजान की एक रात की इबादत हजार रात की इबादत पर भारी है । इस महीने में अल्लाह ने इंसान को अपनी गलती सुधारने और प्राश्चित करने का मौका दिया है । ऐसे में लोगो को किसी भी हॉल में अपनी गलतियों का प्राश्चित कर ईश्वर की नजदीकी प्राप्त करने का अवसर गवाना नहीं चाहिए । खुतबे के पूर्व दोनों समुदायो की नमाज जमात के साथ अदा हुयी । इसके बाद सभी लोगो ने एक साथ इफ्तार किया ।


इस मौके पर अपर पुलिस अधीक्षक नगर रामजी सिंह यादव , सी ओ सिटी सर्वजीत शाही , सी ओ सदर अलका भटनागर , कोतवाल सी बी सिंह , ख्वाजा शमशीर हसन , नजमुल हसन नजमी , कमाल आजमी ,फिरोज अहमद ,हाजी जियाउद्दीन , मौलाना फजले मुमताज , मौलाना कैसर अब्बास , मोहम्मद मुस्तफा शमशी ,फैसल हसन तबरेज, हसनैन कमर दीपू ,जे डी सिंह ,सुहैल असगर खां , आरिफ हुसैनी, राजन मिश्रा, शाहिद मेहदी, मोहम्मद सोहराब आदि के साथ हजारो लोग मौजूद रहे ।
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Friday, July 11

Afsos ad afsos, Maulana Mahfoozul Hasanki waleda ka inteqaal|

Inna Lillaah e wa Inna Alhe Rajaun. 
Afsos ad afsos .


 Maulana Mahfoozul Hasan Khan Imam e Juma wa praicipal Jamia Nasariya Arabic college Jaunpur , ki waleda ka inteqaal ho gaya hai aur marhooma ki tadfeen unke abai watan ke qabristan zila sultanpur me hogi.

Marhooma Maulana Mahmoodul hasan sahab ki ahliya thin jinke do bete qaum ki khidmat me lage hain.Maulana Mahfuzul Hasan aur Maulana Nasir mehdi khan ,muddaris Hamidul Madaris Pihani Hardoi me hain .


Allah marhooma ko maghfirat faraye aur pesmundegan ko sabr ata kare. Jaunpur azadari ki team unke khanwade ko taziyat pesh karti hai .

S.M.Masum
Admin
     
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