Blogger Tips and TricksLatest Tips And TricksBlogger Tricks

Wednesday, April 16

Sharqi period’s Imambargah or Husainiyah of Jaunpur.

A Hussainia, also known as an Ashurkhana or Imambargah, is a congregation hall for Shia commemoration ceremonies, especially those associated with the Remembrance of Muharram. The name comes from Husayn Ibn Ali, the grandson of Muhammad and third  Imam of the Shia. Hussain was killed by Yazid I in Karbala, Iraq to save Islam by the tyrant rulers, over 1,400 years ago. Shias still mourn the death of Hussain every year on the day of Ashura in Hussainias all over the world.

A Hussainiya is different from a mosque in that it is intended mainly for gatherings of people of all the religion for Muharram in the mourning of Hussain ibn Ali, and may not necessarily hold juma'at, or Friday Prayer.

In South Asia, a Hussainia can also be referred to as an imambara, imambargah, or ashurkhana. In Bahrain, and the United Arab Emirates, it is called a ma'tam (مأتم). In Afghanistan and Central Asia, the equivalent term for a Shia congregation hall is takyakhana. Examples of Hussainias include the Bara Imambara and Imambara Ghufran Ma'ab, both in Lucknow, India, as well as the Imambara Wazeer Un Nisa in Amroha, India and the Hosseiniye Ershad in Tehran, Iran.



Jaunpur is famous for its Sharqi and mughal period’s Imambargaah . some Noble Imambargaah are :-

kallu marhoom ka Imambada 

Islam ka Chauk

Sadar imambada

Imam pur Imambada

Hamza Pur Imambada

Sadar Imambada

Panje shareef
 
Old Photo of Panje Shareef


kallu ka Imambada


Sadar Imambada

islam ka chauk

bade imam ka Imambada

Read more...
widgets for blogger

Monday, April 14

इमाम हुसैन का ज़िक्र करने वालों का नाम फ़ातेमा ज़हरा (स.अ) को याद रहता है |

इमाम हुसैन का ज़िक्र करने वालों का नाम फ़ातेमा ज़हरा की लिस्ट में|

किताबे " चेहरये दरख़शाँ हुसैन इबने अली अलैहिमस्सलाम " के पेज न0 227 और 230 पर इस तरह लिखा है महान आलिम हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लमीन जनाब हाज मुर्तज़ा मुज्तहेदी सीस्तानी इस तरह बयान करते हैः
मेरे चाचा जनाब सय्यद इब्राहीम मुज्तहेदी सीस्तानी इमाम-ए-रज़ा अलैहिस्सलाम के पुराने ज़ाकरीन में से थे. मेरे स्वर्गीय चाचा ने एक सपने मे सिद्दीक़ए कुबरा हज़रत फ़ातिमा ज़हरा सलामुल्लाहे अलैहा को देखा कि एक सूची उन के सामने रखी है जो खुली हुई है मैं ने उन इस बारे में पूछा कि यह किस की सूची है ?

सिद्दीक़ए कुबरा हज़रत फ़ातिमा ज़हरा सलामुल्लाहे अलैहा ने फ़रमायाः मेरे बेटे हुसैन की मजलिस पढ़ने वालों का नाम इस सूची में है।
मेरे स्वर्गीय चाचा ने देखा कि कुछ मजलिस पढ़ने वालों का नाम उस सूची में है और वह पैसा कि जो उन को मजलिस पढ़ने का उस मोहर्रम में दिया गया था वह भी उस सूची में लिखा है।
मेरे स्वर्गीय चाचा ने अपना भी नाम उस सूची में देखा और यह भी देखा कि उन के नाम के आगे लिखा था 30 तूमान (ईरानी पैसे को तूमान कहते हैं।)
नींद से जागे तो जो सपना उन्हों ने देखा था बहुत आश्चर्यचकित हुए क्योंकि 30 तुमान उस ज़माने में एक मजलिस का बहुत ज़्यादा पैसा था मगर दो महीने और ज़्यादा मजलिसों के कारण इत्ना पैसा हो सकता था लेकिन संजोग से उसी वर्ष वह बीमार हो गए यहाँ तक कि घर से निकलने की भी ताक़त नही थी और उन की बीमारी हर दिन बढ़ती ही जा रही थी यहाँ तक कि मोहर्रम और सफ़र को महीना ख़तम होने का था। इस दो महीने में सिर्फ़ एक दिन उन की हालत कुछ ठीक हुई और सिर्फ़ एक ही मजलिस में जा सके मजलिस के बाद जिसने मजलिस करवाई थी उस ने उन को एक पैकेट दिया कि जिस में 30 तूमान था ।
इस बात से उन के सपने को सच होना सिध्द है और यह भी सिध्द होता है कि सिद्दीक़ये कुबरा हज़रत फ़ातिमा ज़हरा सलामुल्लाहे अलैहा मजलिस पढ़ने वालों पर कृपा करती हैं और सब कुछ उस महान हस्ती के कन्टरोल में है ।
मजलिस पढ़ने वालों का सिद्दीक़ये कुबरा हज़रत फ़ातिमा ज़हरा सलामुल्लाहे अलैहा की नज़र में क्या पद है और वह लोग कित्ने महान है उन की नज़र में, इस बात का पता इमाम-ए-जाफ़रे सादिक़ अलैहिस्सलाम की इस बात से चलता हैः
कोई भी ऐसा नहीं है कि जो इमाम-ए-हुसैन अलैहिस्सलाम पर आंसू बहाये और रोये मगर यह कि उस का रोना सिद्दीक़ये कुबरा हज़रत फ़ातिमा ज़हरा सलामुल्लाहे अलैहा तक पहुँचता है और सिद्दीक़ये कुबराहज़रत फ़ातिमा ज़हरा सलामुल्लाहे अलैहा इमाम-ए-हुसैन अलैहिस्सलाम पर रोने वालों की सहायता करती हैं, और उस का रोना रसूले ख़ुदा तक भी पहुंचता है और वह इन आंसूओं की क़ीमत अदा करते हैं।

एक दूसरी रेवायत मे भी इमाम-ए-हुसैन अलैहिस्सलाम पर रोने के सिलसिले में इमाम-ए-जाफ़रे सादिक़ अलैहिस्सलाम से वारिद हुआ है कि आप ने फ़रमायाः
जो कोई इमाम-ए-हुसैन अलैहिस्सलाम पर रोता है इमाम उस को देखते हैं और उस के लिए इस्तिग़फ़ार करते हैं और हज़रत अली अलैहिस्सलाम से भी कहते हैं कि वह भी रोने वालों के लिए इस्तिग़फ़ार करें और रोने वालों से कहते हैः

अगर तुम लोगों को मालूम हो जाये कि इश्वर ने तुम लागों के लिए क्या तय्यार किया है तो तुम जित्ना ज़्यादा दुखी होते उस से ज़्यादा उस के लिए ख़ुश होते और इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम उस के लिए इस्तिग़फ़ार करते हैं हर उस गुनाह के लिए जो उस ने किया है।

इमामे हुसैन अलैहिस्सलाम के दुख में एक बूंद आँसु सारे गुनाह को ख़त्म कर देता है रेवायतों में आया है कि जो भी व्यक्ति इमाम-ए-हुसैन अलैहिस्सलाम की मजलिस में आता है उस को चाहिए कि उन के सम्मान का ध्यान रखे।

एक अहम बात यह है कि जो कोई इमाम-ए-हुसैन अलैहिस्सलाम कि मजलिस में रोता है उस को चाहिए कि वह इमाम-ए-ज़माना आज्जल्लाहू फ़रजहुश्शरीफ़ के ज़हूर के लिए दुआ करे और ईश्वर से यह दुआ करे कि वह इमाम के ज़हूर में जल्दी करे ताकि इमाम-ए-ज़माना की दुआ का मुस्तहेक़ हो।

एक जगह इमाम-ए-ज़माना आज्जल्लाहू फ़रजहुश्शरीफ़ ने फ़रमायाः
मैं हर उस व्यक्ति के लिए दुआ करता हूँ जो इमाम-ए-हुसैन अलैहिस्सलाम की मजलिस मे मेरे लिए दुआ करता है।
Read more...

आरडीएम शिया कालेज स्थित मस्जिद ईरान के प्रतिनिधि मौलाना डा. गुलाम रजा मेंहदवी ने पढ़ी नमाज़ |


वे सोमवार को आरडीएम शिया कालेज के प्रांगण में स्थित मस्जिद के जीर्णोद्धार के बाद पहली नमाज पढ़ाने के लिए पहुंचे थे। पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी देश को आगे बढ़ाने के लिए उसकी आर्थिक व शिक्षा नीति अच्छी होनी चाहिए तभी देश तरक्की करता है। भारत में जिस तरह से शिक्षा के साथ-साथ अर्थव्यवस्था का ध्यान रखा जाता है उससे यह देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने भारत के अल्पसंख्यक लोगों से अपील किया कि वे देश को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दें। अपने भारत दौरे पर उन्होंने कहा कि जिस तरह से यहां के लोग उन्हें प्यार, मोहब्बत का पैगाम दे रहे है उससे तो यह साबित हो रहा है कि यह देश आपसी सौहार्द के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। यही वजह है कि यहां के लोगों से मिलने के बाद उनका लगाव यहां के लोगों से बढ़ गया है। मुसलमानों से उन्होंने खासकर अपील किया कि वे मस्जिद, इमामबाड़ों के साथ साथ शिक्षा का केंद्र भी खोले जहां गरीब, बेसहारा बच्चों को अच्छी शिक्षा दी जा सके जिससे की वे देश के अच्छे नागरिक बन सके। उन्होंने कहा कि अलमुस्तफा विश्वविद्यालय ईरान में भारत से हजारों की संख्या में विद्यार्थी डिग्री लेने जाते है जिनकी मान्यता देश के कई विश्वविद्यालय में पहले से ही हैं। इससे पूर्व कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे हाजी सिराज मेंहदी ने कहा कि रजा डीएम शिया कालेज ट्रस्ट ईरान विश्वविद्यालय से मांग करता है कि वे यहां पर भी विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम शुरू कराने की कवायद करें ताकि यहां पर भी यह विश्वविद्यालय का रूप ले सके। इसका मौलाना डा. गुलाम रजा मेंहदवी ने स्वागत करते हुए कहा कि जल्द ही भारत सरकार से बात करने के बाद इसकी कार्रवाई शुरू की जाएगी। इस मौके पर शिया धर्मगुरू मौलाना सफदर हुसैन जैदी, शिया जागरण मंच के अध्यक्ष मौलाना हसन मेंहदी, मौलाना सै. तहजीबुल हसन रिजवी, मौलाना फजले मुमताज, शिया इंटर कालेज के प्रबंधक नजमुल हसन नजमी, शमशीर हसन, फैसल हसन तबरेज, राजेश सिंह, प्रधानाचार्य डा. तसनीम फात्मा, प्राचार्य डा. अषद काजमी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।



ईरानी दूतावास के कल्चर हाउस के काउंसलर व अलमुस्तफा विश्वविद्यालय ईरान के प्रतिनिधि मौलाना डा. गुलाम रजा मेंहदवी ने कहा कि भारत के एक विकसित देश है और यहां के लोग जिस तेजी के साथ आगे बढ़ रहे है और आने वाले 15 साल में इसकी आर्थिक व्यवस्था और अच्छी होगी जिसके चलते पूरे विश्व में अपनी एक अलग स्थान बना लेगा। भारत की मजबूत होती अर्थव्यवस्था पर उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यहां के लोगों ने जिस प्रकार से मेहनत कर इस देश को आगे बढ़ाया है वो काबिले तारिफ है। यही वजह है कि दुनिया के हर मुल्क की निगाह भारत पर टिकी रहती है और ईरान से उसकी दोस्ती पूरे विश्व में जगजाहिर है।

Read more...

Thursday, April 10

इलेक्ट्रानिक मीडिया के पत्रकार मो0 अब्बास के पिता सैयद शबीहुल हसन का निधन |

जौनपुर इलेक्ट्रानिक मीडिया के पत्रकार मो0 अब्बास के पिता सैयद शबीहुल हसन उम्र 61 वर्ष पुलिस लाइन स्थित आवास पर गुरुवार की सुबह हृदय गति रुक जाने से निधन हो गया। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में पत्रकारों के साथ स्थानीय नेता व कई सामाजिक संगठनों के लोगों ने पहुंचकर अपनी शोक संवेदना प्रकट किया। स्व0 शबीहुल हसन विगत कई वर्षों से पुलिस विभाग में एच.सी.एम.टी. पद पर कार्यरत थे और पिछले वर्ष ही वे सेवा निवृत्त हुये थे। उनके दो पुत्र पुलिस विभाग में अधिकारी हैं तथा दो पुत्र पत्रकारिता से जुड़े हैं। मृतक का अन्तिम संस्कार शुक्रवार को प्रातः 8 बजे आजमगढ़ स्थित पैतृक गाँव बसरा इमा, कप्तानगंज में होगा।


जौनपुर पत्रकार संघ की एक शोक सभा अध्यक्ष ओम प्रकाश सिंह की अध्यक्षता में सम्पन्न हुयी। जिसमें स्व0 शबीहुल हसन के आकस्मिक निधन पर पत्रकारों ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि ईश्वर मृतक की आत्मा को शान्ति दे तथा दुःख के इस घड़ी में परिवार को सहन करने की शक्ति प्रदान करे। पत्रकारों ने 2 मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। 
शोक सभा में वरिष्ठ पत्रकार लोलारक दूबे, राजेन्द्र सिंह, आई.बी. सिंह, कपिल देव मौर्य, राजकुमार सिंह, शशि मोहन सिंह क्षेम, डा0 मधुकर तिवारी, डा0 मनोज वत्स, अखिलेश तिवारी अकेला, वीरेन्द्र पाण्डेय, राकेश कान्त पाण्डेय, राजेश श्रीवास्तव, राजेश गुप्ता, जे. डी. सिंह, योगेश श्रीवास्तव, सतीश सिंह, दीपक उपाध्याय, रुद्र प्रताप सिंह, शशिराज सिन्हा, जय आनन्द, प्रमोद जायसवाल, ऋतुराज सिंह, जावेद अहमद, आरिफ हुसैनी, विश्व प्रकाश श्रीवास्तव, विद्याधर विद्यार्थी, अमित गुप्ता, यादवेन्द्र दूबे मनोज, राजन मिश्र, अमित गुप्ता, सुहैल असगर खान, सै0 अरशद अब्बास, मेराज अहमद, आशीष श्रीवास्तव, अजीत चक्रवर्ती, संजय शर्मा, विनोद विश्वकर्मा, संजय, आशीष श्रीवास्तव सहित अन्य पत्रकारगण मौजूद रहे। शोक सभा का संचालन महामंत्री हसनैन कमर दीपू ने किया। वहीं भोजपुरी सुपर स्टार रवि किशन, कैबिनेट मंत्री पारसनाथ यादव, पूर्व मंत्री सुभाष पाण्डेय, डा0 के0 पी0 यादव, कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष हाजी सिराज मेहदी, जिला कांग्रेस कार्यकारिणी अध्यक्ष राजेश सिंह, उपाध्यक्ष फैसल हसन तबरेज, मो0 आजम, शिया इण्टर कालेज के प्रबन्धक नजमुल हसन नजमी, मीना गल्र्स कालेज के प्रबन्ध सै0 शमशीर हसन सहित अन्य लोगों ने स्व्0 हसन के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
जौनपुर इलेक्ट्रानिक मीडिया के पत्रकार मो0 अब्बास के पिता सैयद शबीहुल हसन उम्र 61 वर्ष पुलिस लाइन स्थित आवास पर गुरुवार की सुबह हृदय गति रुक जाने से निधन हो गया। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में पत्रकारों के साथ स्थानीय नेता व कई सामाजिक संगठनों के लोगों ने पहुंचकर अपनी शोक संवेदना प्रकट किया। स्व0 शबीहुल हसन विगत कई वर्षों से पुलिस विभाग में एच.सी.एम.टी. पद पर कार्यरत थे और पिछले वर्ष ही वे सेवा निवृत्त हुये थे। उनके दो पुत्र पुलिस विभाग में अधिकारी हैं तथा दो पुत्र पत्रकारिता से जुड़े हैं। मृतक का अन्तिम संस्कार शुक्रवार को प्रातः 8 बजे आजमगढ़ स्थित पैतृक गाँव बसरा इमा, कप्तानगंज में होगा।


जौनपुर पत्रकार संघ की एक शोक सभा अध्यक्ष ओम प्रकाश सिंह की अध्यक्षता में सम्पन्न हुयी। जिसमें स्व0 शबीहुल हसन के आकस्मिक निधन पर पत्रकारों ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि ईश्वर मृतक की आत्मा को शान्ति दे तथा दुःख के इस घड़ी में परिवार को सहन करने की शक्ति प्रदान करे। पत्रकारों ने 2 मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। 

शोक सभा में वरिष्ठ पत्रकार लोलारक दूबे, राजेन्द्र सिंह, आई.बी. सिंह, कपिल देव मौर्य, राजकुमार सिंह, शशि मोहन सिंह क्षेम, डा0 मधुकर तिवारी, डा0 मनोज वत्स, अखिलेश तिवारी अकेला, वीरेन्द्र पाण्डेय, राकेश कान्त पाण्डेय, राजेश श्रीवास्तव, राजेश गुप्ता, जे. डी. सिंह, योगेश श्रीवास्तव, सतीश सिंह, दीपक उपाध्याय, रुद्र प्रताप सिंह, शशिराज सिन्हा, जय आनन्द, प्रमोद जायसवाल, ऋतुराज सिंह, जावेद अहमद, आरिफ हुसैनी, विश्व प्रकाश श्रीवास्तव, विद्याधर विद्यार्थी, अमित गुप्ता, यादवेन्द्र दूबे मनोज, राजन मिश्र, अमित गुप्ता, सुहैल असगर खान, सै0 अरशद अब्बास, मेराज अहमद, आशीष श्रीवास्तव, अजीत चक्रवर्ती, संजय शर्मा, विनोद विश्वकर्मा, संजय, आशीष श्रीवास्तव सहित अन्य पत्रकारगण मौजूद रहे। शोक सभा का संचालन महामंत्री हसनैन कमर दीपू ने किया। वहीं भोजपुरी सुपर स्टार रवि किशन, कैबिनेट मंत्री पारसनाथ यादव, पूर्व मंत्री सुभाष पाण्डेय, डा0 के0 पी0 यादव, कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष हाजी सिराज मेहदी, जिला कांग्रेस कार्यकारिणी अध्यक्ष राजेश सिंह, उपाध्यक्ष फैसल हसन तबरेज, मो0 आजम, शिया इण्टर कालेज के प्रबन्धक नजमुल हसन नजमी, मीना गल्र्स कालेज के प्रबन्ध सै0 शमशीर हसन सहित अन्य लोगों ने स्व्0 हसन के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
Read more...

Sunday, April 6

जश्ने बाबुल हवाएज दक्खिनपट्टी बबरखां


सरायख्वाजा क्षेत्र के दक्खिनपट्टी बबरखां गांव में शनिवार की रात जश्ने बाबुल हवाएज के उनवान से एक तरहीं महफिल ए मकासेदा का आयोजन किया गया। जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों से आये हुए शायरों ने दिये गये दो मिसरों पर अपना कलाम पेश किया। रात भर चले इस कार्यक्रम में लोगों ने शायरों के एक से बढ़कर एक कलाम का लुत्फ उठाया। कार्यक्रम की शुरूआत तेलावते कलामे पाक से हुई। जिसके बाद फैजाबाद से आये उलेमा ने तकरीर की और महफिल का आगाज किया गया। महफिल में समाज बांधते हुए धामपुर से आये युवा शायर फैज धामपुरी ने अपना कलाम पेश किया। उनके इस शेर की खुब प्रशंसा की गयी।
इस वास्ते फ़ौज को  सुनाया कलामे पाक
कह दे न कोई शख्स कि शब्बीर मर गये।

उनके बाद कानपुर से आये शायर कमाल वारसी ने अपने कलाम से खूब शमां बांधी। उनके भोजपुरी कलाम की भूरि-भूरि प्रशंसा हुई। तरह पर पढ़े गये कलाम में उनका यह शेर खूब सराहा गया।

शीर-ए-मादर की तहारत की करामत देखिये
मेरे हिस्से में अली मौला का मिम्बर आ गया।

अपना कलाम पेश करते हुए सागर बनारसी ने लोगों को वाह-वाह करने पर मजबूर कर दिया। उनका शेर

ऐ मौत आ कि अब तेरे आने का गम नहीं,
मेरे सराहने हजरते अब्बास आ गये।


चांद उरई के कलाम की भी खूब-खूब प्रशंसा हुई और लोगों ने जमकर वाह-वाही की। उनका शेर

हैबते जैगम से यूं पसपा हुई लाखों की फौज,
अर्श से जैसे अबाबिलों का लश्कर आ गया।


सलमान काविश के पूरे कलाम की खूब-खूब सराहना की गयी। गैर तरह में उनका यह शेर बहुत पसंद किया गया।

कर्बला में इसलिए सूरज सवां नैजे पर था
रौशनी लेनी थी  उसको हजरते अब्बास से।

तरह में पढ़ा गया उनका शेर

 जाता है प्यासा कुएं के प्यास सुनते थे
मगर उठ के एक प्यासे के चुल्लू में समुंदर आ गया।

शायर शहर अर्शी के शेर की भी खूब सराहना की गयी। उनका शेर हर

एक साथी का किरदार आइना था
मगर परख रहे है शहे कर्बला बुझाके चिराग।


बादशाह राही ने जब ये शेर पढ़ा तो लोग झूम उठे। उनका शेर

एक दो तीन होना बुरी बात है बीज नफरत के बोना बुरी बात है।


खुर्शीद मुजफ्फरनगरी ने एक से बढ़कर एक कई कलाम सुनाये कभी गालिब की जमीन पर गजल के मिसरों को मदह में जोड़कर तो कभी दिये गये मिसरे पर। उनका शेर

जुल्म के रूख पे खौफ तारी है कट गया सर बयान जारी है,
सब्र से जुल्म का तकाबुल क्या, एक शहंशाह एक भिखारी है।


महफिल में शोएब नौगानवी, जफर आलमी, शहंशाह मिर्जापुरी, हैदर मौलायी बनारसी, सलीम बनारसी, आफताब मिर्जापुरी, अहमद रजा जलाली ने भी कलाम पेश किया। कार्यक्रम के अंत में बुजुर्ग शायर कम्बर जौनपुरी ने अपने मिसरे पर कलाम सुनाया। कार्यक्रम का संचालन डा. नैय्यर जलालपुरी ने किया। इस मौके पर बतौर मुख्य अतिथि मोहम्मद हसन पीजी कालेज के प्राचार्य डा. अब्दुल कादिर खां एवं डा. कमर अब्बास समेत तमाम लोग मौजूद रहे। अंत में सामिन रजा खां ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।
Read more...

Popular Azadari Video